होम › श्री हित बयालीस लीलाश्री हित बयालीस लीला — छंद 14.14शृङ्गार-शत — तृतीय श्रृङ्खला नवल कुँवर दोउ रसिक-मनि, उपमा दीजै कौन।चितै-चितै मुख-माधुरी, ह्वै रहियै 'ध्रुव' मौन॥१४॥