॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

श्री हित बयालीस लीला — छंद 14.42

शृङ्गार-शत — तृतीय श्रृङ्खला

आज की छबीली छबि-छटा चित बेधि रही,
कही नहीं जाति कछू औरै गति भई है।
नवल युगल-हास चितवति ठाढ़ी पास,
मानौं तेहि ओर नई नेह-बेलि बई है॥
‘हित ध्रुव’ नीरज से नीर भरे ढरैं नैन,
बोलति न कछू बैंन चित्र सी ह्वै गई है।
नैंना छाइ लीन्हें रूप परी तब प्रेम कूप,
बाकी गति जानै सोई जेहि अनभई है॥४२॥