॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 15.35

मणि-शृङ्गार

अति सुढ़ार सुठि सुमिलि बनी, मनिमय जेहरि चारु।
चलनि छबीली भाँति पर, मत्त मरालनि वारु॥३५॥

अर्थ / व्याख्या

भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)

सुन्दर जेहरि सुढार मणियों से जटित होकर अलङ्कृत हैं श्री प्रिया जू के श्रीचरणों की मदमन्थर गति पर मत्त राजहंस न्यौछावर हैं