उपमा तौ सब जे कहीं, ऐसी चित्त विचारि।
जैसैं दिनकर पूजियै, आगे दीपक बारि॥४२॥
अर्थ / व्याख्या
भावार्थ (स्वामी श्री हितदास जी — पुस्तक की टीका, स्कैन से; छोटी त्रुटियाँ सम्भव)
मैंने अपने विचार से जिन उपमाओं को प्रस्तुत किया है वह सब ऐसे ही है, जैसे प्रज्वलित दीपक को सम्मुख रख कर सूर्य की अर्चना की जाती है