॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित बयालीस लीला — छंद 16.3

हित-शृङ्गार

जलज-थलज विकसित सहज, नील-पीत सित-लाल।
हेम-बेलि रही लपटि कै, सुंदर सुभग तमाल॥३॥