॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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श्री हित सेवक वाणी — पद 14.11

श्रीहित काचे धर्मी प्रकरण

एक गुरुन्न सौं वाद करंत, जु पंडित मानी ह्वै जीभहि ऐंठत।
एक दरव्य के जोर बरब्बट, आसन चाँपि सभा मधि बैठत॥
एक जु फेरि रीति उपदेशत, एक बड़े ह्वै न बात प्रमानत।
काचे धरम्मिन के सुनों छन्द, धरम्मी धरम्म मरम्म न जानत॥