मैं लोगों की मदद करता हूँ, फिर भी वह मेरी Value नहीं समझते हैं, ऐसा क्यों होता है ?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
महाराज जी हम किसी को धन शारीरिक तरीके से मदद करते हैं फिर भी जिसके लिए इतना करते हैं उसको हमारी अहमियत क्यों नहीं होती महाराज तुम गलत हो अध्यात्म की दृष्टि से इसीलिए तुम्हें दुख होता है कि लोग मान्यता हमारी क्यों नहीं करते क्योंकि तुम कर्जदार हो उसको पैसा दे दिए हो तुम्हारी ईमानदारी कि उसकी वस्तु उसको दे दी है तो तुम्हारी बड़ाई क्यों करें क्यों नमस्कार करें उसकी धरोहर है उसको चली गई तुम समझते हो मैंने पैसा दिया अगर ईमानदारी से पूछो तुमको जिसने दिया उसको उसको दिला दिया क्योंकि उसका था अगर तुम्हें फिर मिलना है तो वापस आ जाए कि नहीं मिलना है तो राधेश्याम हम आपको ₹1 दें परसों आप हमको 00 दे दें हम आपको धन्यवाद बोलेंगे क्या अरे भाई मेरी चीज है मेरे को प्राप्त हो गई ऐसे ही भगवान ने आपको वस्तुएं दी है भगवान ने आपको बुद्धि दी है भगवान ने आपको धन दिया भगवान ने आपको बल दिया अब व्यवहार में भगवान आपके द्वारा परोपकार करवा रहे हैं आपने किसी को दिया और वो आपसे मतलब ही नहीं रख रहा तो आपको मानना उसकी
धरोहर उसके पास पहुंच गई वो हमसे क्यों मतलब रखे इसका विधान परमात्मा जानते हैं हम तो जानते नहीं तो हमको इस बात से संतोष करना है कि भगवान ने मेरे द्वारा जो कर्जा था वो दिलवा दिया आप मुनिम हो मालिक के खाते में जमा हो गया तो बड़े आनंदित रोग मालिक बन जाने पर समस्या हो जाएगी
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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