बच्चे या लोग पैसे माँगे तो क्या देने चाहिए या नहीं ?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
कभी रास्ते में कुछ बच्चे एवं हष्ट पुष्ट लोग जो काम कर सकते हैं वह दान दक्षिणा की मांग करते हैं मैं कभी-कभी बड़े संकोच में पड़ जाता हूं कि सहायता करूं या ना अर्थ की डायरेक्ट सहायता बहुत विचार से करनी चाहिए आपके पैसे से वो मांस खरीद सकता है वो गलत आचरण में झुआ खेल सकता है वो ड्रग से ले सकता है आपको शरीर पोषण के लिए चाहिए तो हम भोजन दे सकते हैं हमारी जितनी सामर्थ्य है हम आपको वस्त्र दे सकते हैं पैसा देने में पात्रता की बात देखनी है आपने आगे लिखा है कि कुछ लोगों ने इसको व्यवसाय भी बना लिया बिल्कुल बिल्कुल दर्शन करने राधा वल्लभ जी के जा रहे थे तो एक बच्चा एक महिला एक छोटा बच्चा एक पुरुष कहा बाबा जी बाबा जी सुनो सुनो कहा जी तो उ कहा मैं महाराष्ट्र का हूं तो ट्रेन में हमारा मथुरा में सब कुछ लुट गया मैं वृंदावन पैदल आया हूं यहां दर्शन भी कर लिए अब वापस जाने के लिए पैसे नहीं दे सकते और दूसरे दिन देखा व दूसरे व्यक्ति को फंसा के खड़ा किए हुए वो हमसे बात ही नहीं किया व वो तो जिस आदमी को फसा रहे थे
वो तो चला गया वो हमसे बात ही नहीं के चल दिए तो हमें लगा इनका मतलब व्यापार है क्योंकि ऐसे मांगने में -20 देंगे और किराए की उसमें अब बच्चा है स्त्री है बेटा है तो लगता है कि बात सत्य हो गी हो सकता है इनकी जेब कट गई हो सकता है इनकी बेग कोई उठा ले गया हो जो झूठ है छल कपट है इतनी सफाई से किया जाता है कि अपने लोग तो समझ ही नहीं सकते वो तो अगर दूसरे दिन दिखाई नहीं देता तो हमारी समझ में नहीं आता फिर हमें समझ में आया कि मतलब इतनी जोर का हमको दान पुण्य बहुत संभाल के करना है बहुत संभाल के करना है
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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