हनुमान जी ने जब भीम का अहंकार तोड़ा !
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
जब भीम पुष्प लेने जा रहे थे सौगंध की वन तो हनुमान जी ने सोचा कहीं अपराध न बन जाए ऋषियों का इसलिए रास्ते में बैठ गए बंदर के रूप में लंबी पूछ तो शास्त्रीय सिद्धांत है किसी पशु को भी नहीं लांघना चाहिए नहीं पुण नष्ट हो जाते हैं आजकल के लोग समझते नहीं जैसे कोई सोया हुआ पुरुष है तो आप लांग नहीं सकते नहीं आपके पुण्य नष्ट हो जाएंगे या कोई पशु है तो आप छलांग नहीं मार सकते आप साइड से जाइए अब उनकी इतनी लंबी पूछ थी कि साइड में पहाड़ है छोटी रास्ता बीचवे हनुमान जी से कहा वायुपुत्र भीम जी ने वायुपुत्र हनुमान भीम ने कहा ए बंदर पूछ हटा ले मुझे जाना है कहा बूढ़ा हो गया हूं हिम्मत नहीं हटाने की हटा लो कहा मेरी अवहेलना करता है कहा हटा लो भाई बूढ़ा हो गया हूं मेरी पूछ हटा के चल दो पूरा बल भीम ने लगा दिया तो हाथ जोड़कर खड़े हो गए कि मैं समझ गया साधारण बंदर नहीं आप मेरे बड़े भ्राता पवन पुत्र हनुमान हनुमान जी ने बताया कि आगे जो है देव ऋषियों का मार्ग है आप जाओगे तो अपराध बन सकता है तो उन्होने कहा भैया मैं
आपके उस रूप को देखना चाहता हूं जिस रूप में आपने लंका दहन करने के समय कनक धरा का शरीरा समर भयंकर अतिबल उका तुम देखने की क्षमता नहीं तो उन्होने कहा भैया जरूर दिखाओ तो हनुमान जी ने जेही अडस किया और रूप बढ़ने लगा भीम कपामा वो वही रोक दिया बोले अभी पूरा नहीं है अभी इतना ही है जिसम काप रहे थे भीम हनुमान जी का रूप देखने के सामर्थ्य तो उनके भाई भीम में भी नहीं थे तो हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए सीताराम नाम कीर्तन करो राम चरित्र का गायन करो प्रार्थना करो वो दर्शन दे देंगे
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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