महाराज जी ने अपने BIRTHDAY (जन्मदिन) का रहस्य बताया।
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
यह लोक में मनाते हैं बर्थडे यह जो अपने लोग जन्मोत्सव मनाते हैं यह पार्थिव नाशवान शरीर का जन्मदिन नहीं है यह गुरु प्रदत्त स्वरूप का जन्मदिन है जिस दिन निज मंत्र मिला जिस दिन गुरुदेव ने सहचर भाव का इसमें आरोप करके अंकुरण किया बीज बोया उसी दिन को हम मनाते हैं यह आज का वोह दिन है जिस दिन सदगुरु देव भगवान ने इस अधम को स्वीकार करके सहचर भाव की प्राप्ति के लिए निज मंत्र विरक्त भेष और भाव प्रदान किया उसी का हम उत्सव मनाते हैं इस नाशवान शरीर का उत्सव इसका
तो मात्र ही नहीं है आज है कल नहीं इसका उत्सव मनाएंगे नहीं रसिक जन कभी शरीर का उत्सव नहीं मनाते ये जो जन्म दिन है ये गुरु कृपा का उत्सव यह हमारा वास्तविक जन्म है इस जन्म का क्या महत्व यदि भजन विहीन गया तो शूकर कुकर की तरह मर कर के फिर अन्य योनियों में गए लेकिन गुरु ने जो जन्म दिया अब ऐसा नहीं हो सकता कि सूकर कूकर की तरह जीवन व्यतीत हो जाए नहीं अगर आप उनकी आज्ञा पर चलेंगे तो जीते जी तुम्हें पता चल जाएगा कि हमारा जन्म मरण खत्म हो गया अपने को पता चलता है जाने मोरी छाती ये किसी के प्रमाण की जरूरत नहीं पहले ही पता चल जाता है खत्म अब आवागमन चक्र खत्म स्वरूप बोध अपने आप सब पता चल जाता है किसी को इसमें बताने की थोड़ी जरूरत तुम्हारी अब जन्म मरण परंपरा खत्म वो अपना हृदय बताता है
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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