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अब तक 150 से अधिक पुरुषों से संबंध बना चुका हूँ अब बहुत दुखी हूँ

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

आप कह रहे हैं कि इनका 150 से वैदिक पुरुष से पुरुष संबंध हो गया। ये आपकी कोई उपज नहीं है। ये आपकी कोई मनपसंद बात नहीं है। आपके दिमाग में पूर्व प्रारब्ध वसात ये संस्कार है। तो इस संस्कार को जीतने के लिए मनुष्य शरीर मिला है। इसी संस्कार में मिट जाने के लिए नहीं मिला है। अगर आप जीतते नहीं है। कितना गंदा स्वरूप आपका होगा। चाहे वो बहन हो, चाहे भाई हो। आप विचार करके देखो। उसके जीवन का मतलब क्या रहेगा केवल मनोरंजन और ये आप में ही नहीं है। लाखों बच्चों में है।

अगर आप पुरुष संयोग ना करें तो स्त्री से आपकी आसक्ति नहीं है तो आप एक भगवत प्राप्त महापुरुष बन सकते हैं। अच्छा थोड़ा विवेक से सोचो आपने ऐसा किया भी। क्या मिला आपको? केवल डर मिला और चिंता मिली। और कोई सुख तो मिला नहीं। तो मुझे लगता है यदि आप थोड़ा भगवन नाम जप करें और इसे कंट्रोल करें। क्या है भाई? कौन सा सुख है? दुर्गंध और मल भरा हुआ है। वहीं से तुम्हारी रति है। हां, इसको सुधारा जाए। अगर बचे हैं तो अध्यात्म की शरण में, भगवान की शरण में, सतार्ग में नहीं तो बचने का कोई चांस नहीं

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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