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राजा ने भक्त सदन कसाई जी के हाथ क्यों कटवा दिए थे?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

श्री सदन कसाई जी जगन्नाथ पुरी जा रहे थे दर्शन करने तो रास्ते में घर में आवाज लगाई भिक्षामदे तो एक नौ वधू निकली उस नौ वधू ने जे भी देखा वो लुट गई उसने कहा यही पा लीजिए अब संत सरल चित बैठ गए संध्या का समय था प्रसाद उस स्त्री ने हाथ जोड़ा और कहा महाराज जी अगर रात्रि यही शयन कर लो और सुबह आप बड़ी श्रद्धा देखिए तो अब रात्रि में जब शयन की स्थिति में तब वो आकर अपनी काम वेदना प्रकट की तो उन्होंने कहा देवी आपके पति हैं आप ऐसी चेष्टा करते उसका उल्टा दिमाग चला कि मानो ये कह रहे हैं आपके पति अगर पति ना होते तो उसने अपने पति की हत्या कर दी सोते हुए फिर आई और कहा अब स्वीकार करो कहा दुष्ट उन्होंने कहा अगर मैंने हल्ला मचा दिया तो तुम्हारी अभी दुर्गति हो जाएगी तो उन्होंने कहा नहीं मैं धर्म विरुद्ध आचरण नहीं कर सकता मृत्यु को स्वीकार कर सकता हूं उसने हल्ला मचा दिया लोग एकत्रित क्या हुआ ये हमसे गलत करना चाहता था हमारे पति ने रोका पति को मार डाला और फिर गलत करना चाहता था मैं हल्ला मचा दिया वो सदन जी जय

जगन्नाथ जय जगन्नाथ भगवान आप देख रहे लोगों ने मारा पीटा बंदी बना लिया। राजा के पास ले गए। राजा ने जब ऐसी बात सुनी और देखा कि भक्त है तो दोनों हाथ कटवाकर फांसी तो नहीं दी पर छोड़ दिया। एक भी अपराध नहीं है इसमें। लेकिन पूर्व में जिस कर्म से कसाई बने आके वो कोई न कोई पाप कर्म रहा ना वही हाथ कटवा लिए गए। जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ। जगन्नाथ जी पहुंचे प्रभु अब तो हाथ भी नहीं जोड़ सकते। तो ऐसे करके जे भी किया नवीन हाथ आ गए। भक्तमाल ग्रंथ में लिखा हुआ

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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