अब मुझे भी पैसा कमाना है, क्योंकि बिना पैसे के ये दुनिया सुनती नहीं!
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
खुश रहना चाहता हूं महाराज जी पर मेरे को धन की कमाने की बहुत लालसा है और मैं बड़ा आदमी बनना चाहता हूं क्योंकि पैसे के बिना कहीं भी कितना बड़ा बनना चाहिए कितना बड़ा बनना चाहते अंत ही नहीं है इस चीज का तो कोई हां ये विवेक की बात है कि इसका अंत नहीं है तो जब उसका अंत नहीं है तो हम जितने में क्या उतने में संतुष्ट नहीं रह सकते हमें संतुष्ट होना पड़ेगा चाहे जितना हम बड़े हो जाए ये बहुत सुंदर उत्तर दिया कि इसका अंत नहीं है उसका अंत नहीं है तो हम जहां आज चाहे जितना बड़े बन जाए हमारी बड़े होने की लालसा है कभी मिटेगी नहीं तो इसे मिटाना ही तो पड़ेगा तो आज मिटा दो बच्चा तो जितने में हो उतने में सुखी हो जाओगे संतोष भगवान मुझे जैसे रख रहे हैं जैसी परिस्थिति दिए मैं राजी हूं यही सबसे बड़े धनी की पहचान है कि अगर हमें नमक रोटी मिलती है तो मैं संतुष्ट हूं क्योंकि इसका कभी अंत नहीं है।
भारत के सबसे नंबर एक धनी बन जाओगे तो तुम्हें विश्व के बनने की और विश्व के बन जाओगे तो फिर देवराज इंद्र बनने की देवराज बन जाओगे तो ब्रह्मा बनने की कभी इसका अंत तो है नहीं हमारी बात मान लेना नाम रूपी धन तुम एकत्रित करो उसे भजा लो जितने बड़े धनी बनना चाहो बन जाओगे इसलिए यदि नाम जप करोगे हमारी बात मान लो हर संकट की निवृत्ति और हर लाभ आपको प्राप्त होगा।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- जिससे प्रेम होता है, उसकी हर चीज़ प्यारी लगती है — जब हम किसी को अपना मानते हैं तो बार-बार उसकी चर्चा करने में, बार-बार उसकी चर्चा सुनने में और वह गली भी प्यारी लगती है जिसमें अपना प्यारा रहता है और उसके पड़ोसी भी प्यारे लगते…
- भगवान कब मिलते हैं? हर साधक को जानना चाहिए | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj — एक बार नारद जी महाराज भ्रमण करते हुए जा रहे थे तो कुछ समीप पे एक बट वृक्ष के नीचे महात्मा भजन कर रहे थे एक पीपल के नीचे भजन कर रहे थे तो नारद जी को प्रणाम करके बट वृक्ष वाले…
- मौका बार-बार नहीं मिलता.. कहीं देर न हो जाए! — यह जितनी भी गंदी बातें हैं मदिरापान करना, मांस खाना, जुआ खेलना, व्यभचार करना यह सब महापाप है। बुद्धि को भ्रष्ट कराकर ऐसे जीव को नष्ट हो जाता। यह समझ में नहीं आता। मनुष्य शरीर…
- माँगी हुई हर चीज़ क्यों नहीं मिलती, क्या वजह है? — मां के पास गए हमें इतने रुपए दीजिए नहीं हमें चाहिए इतने नहीं देंगे नहीं देंगे नहीं देंगे तो बदमाश बर्बाद करेगा तो यह बात मां से ही हो सकती है दूसरे से नहीं हो सकती आप दूसरे से…
- 🤍🤍राधापिय जू के फूल बंगला में दर्शन 🤍🤍 — राधा राधा श्री राधा राधा राधा राधा श्री राधा राधा श्री राधा राधा राधा राधा श्री राधा [घंटा] राधा श्री राधा राधा राधा राधा श्री राधा राधा श्री राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा…
- कलियुग में ऐसा क्या खास है जो सतयुग में भी नहीं? — कलयुग पापों का विस्तार करेगा तो मुनियों ने विचार किया कि पापों से कैसे बचा जाए तो भगवान व्यास देव जी उस समय गंगा जी में स्नान कर रहे थे तो सबने सोचा चलो व्यास जी से चलकर के…