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क्या मैं मनहूस हूँ या यह केवल नियति है?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

मैं किसी जीव की सेवा भाव से मदद करती हूं परंतु वो मर जाता है। महाराज जी क्या मैं मनहूस हूं? नहीं उसकी आयु समाप्त होती है तभी वो मरता है। किसी की सेवा करने से कोई नहीं मरता है। गुरु जी जिसको पता चलता है ना वो कहते हैं हम आपके घर भी नहीं आएंगे। टच कर दोगे तो मर जाएंगे। राधा राधा अरे ऐसा कुछ नहीं होता। ऐसा ऐसा कुछ नहीं होता। ऐसा संसार के अलग सूत्र है। गुरु जी हर बार यही होता है मेरे साथ। तो हो सकता है हर बार संयोग ऐसा ही बनता हो कि वही मिलते हो जिनको ढंगना है।

भाई सहयोग भी तो है कि वही पशु पक्षी मिलते हैं जिनको पधारना है तो 10 पांच बार ऐसा हो गया तुम्हें लगा मनहूस है ऐसा नहीं है ऐसी सब बातें नहीं माननी चाहिए और ऐसी बातें दिमाग में बैठा लो तो डिप्रेशन हो जाएगा जितना लिखा है उतने में ही स्वासे रहेंग चाहे पशु पक्षी की हो चाहे मनुष्य की हो किसी के छूने या किसी की सेवा करने या किसी के कहने से अगर कहने से हो तो बहुत लोग मनाते हैं कि पड़ोसी मर जाए वो मर जाए सब मर ना जाए ऐसे कोई नहीं मरता जब जिसकी आयु आती है तभी मरता है।

उसको भोगना पड़ेगा। वो चाहे कीड़े पड़ जाए जब तक आयु नहीं समाप्त है तब तक नहीं मर सकता। और आयु समाप्त चाहे अमृत पिला दो फिर भी मर जाएगा। उसमें अपना कोई भाग्य नहीं लगता कि हम सेवा किए वो बच नहीं पाया तो हम मनहूस

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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