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क्या हम दूसरों की पीड़ा दूर करने के लिए भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

हम जब किसी की पीड़ा या दुख देखते हैं, सुनते हैं तो दुखी हो जाते हैं। क्या प्रभु से प्रार्थना करने पर सामने वाले की पीड़ा कम हो सकती? हम यह सहयोग कर सकते हैं कि भगवान से प्रार्थना करें कि उसको सहन करने की शक्ति दें। हमारे पास अर्थ हो तो हम उसकी दवा की व्यवस्था करें। जो अन्न धन आदि जो भी व्यवस्था लेकिन हम किसी के प्रारब्ध को मिटा सके। ऐसा असंभव है। अगर प्रारब्ध दुआओं से नष्ट होता, आशीर्वादों से नष्ट होता तो यहां आकर के सैकड़ों गृहस्थ जन हमें आशीर्वाद दे गए।

सैकड़ों संत जन आशीर्वाद दे गए। स्वस्थ रहो ऐसा लेकिन डायलिसिस होता है। किडनी खराब है। कष्ट शरीर में रहता है। अवश्य में भोक्तव्यम कृतम कर्म सुशभम। इसलिए हम किसी के दुख से दुखी होना यह हमारा मतलब सात्विक हृदय है। पर हम उसके दुख को दूर नहीं कर सकते। उपाय कर सकते हैं। भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं। हम अन्न वस्तु औषधि आदि की ये सहायता कर सकते हैं। बकाया मिटाया नहीं जा सकता। अगर मिटाया जाता तो भजन बल से मिट जाता। नहीं मिटाया गया। इसे भोगना पड़े। भोग के ही मिटाया जा सकता

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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