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शरीर संबंधी चाचा, जीजा आदि त्योहारों में पैसे दें तो क्या लेने चाहिए?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

कि शरीर के बहुत से ऐसे रिश्ते होते हैं जैसे चाचा, मामा, भाई, ननंद, उनके बच्चे इत्यादि जो घर में आना जाना होता है त्योहारों पे तो पैसे या भेंट आदि का आदान प्रदान होता है। तो महाराज जी ये अगले जन्म में लेनदेन फिर से बन रहा है महाराज जी अगर वो कभी हम गए उनके घर में हां अगर इसको काटना है तो एक उपाय बता देते हैं। मान लो जीजा हैं उनमें भगवान को देखा। उनके पैर छुए उनको जो दान पुण्य किया तो हम अपने भगवान को कर रहे हैं। अपने रिश्ते नातेदारों का जो हम आदर करें इससे बड़ा आदर क्या होगा कि हम आपको साक्षात भगवान मान रहे हैं।

भगवान मानकर आदर करें तो वो पुण्य नहीं होगा। वो भगवत सेवा बन जाएगी और भगवत सेवा का फल भगवत प्राप्ति होती है। तो हम किसी भी रिश्ते नातेदार किसी भी आए हुए अतिथि या घर के सदस्यों में यदि हम भगवत भाव कर पावे तो कर्म बंधन से हम कट जाए। इसीलिए हमें सब में भगवत भाव करना चाहिए। भगवत भाव से हमें भगवान की ही प्राप्ति होगी ना कि कर्म के अनुसार पुण्य बंधन बनेगा। पुण्य बंधन नहीं बनेगा। भगवान की प्राप्ति होगी। महाराज जी जैसे हमें कोई देता है तो यह मान करके कि हमारे भगवान हमको प्रसाद स्वरूप से दे रहे हैं।

हमारे भगवान है सामने और बस भगवत भाव सब जगह से बचा लेगा। मेरे भगवान मुझे दे रहे हैं तो मैं उन्हीं की तो शरण में हूं। चाहे इस रूप में दे चाहे इस रूप में दे जिस रूप में दे रहे हैं मेरे भगवान दे रहे हैं उसका पोषण कर रहे

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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