गृहस्थ जीवन को सरल बनाने वाले महाराज जी के उपदेश!
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
जी आप सब ट्रस्ट में रहते हैं। पर ट्रस्ट की बहुत सारी ऐसी जिम्मेदारियां होती हैं। परिवार की जिम्मेदारियां होती हैं। गृहस्थ कार्य होते हैं। ऑफिस जाना होता है। ऐसे में भजन बहुत बाधित होता है और करना भी चाहे तो हो नहीं पाता। महाराज जी ऐसे में आपका मतलब करना चाहे तो हो नहीं पाता। ऐसी बात तो नहीं है क्योंकि युद्ध से बढ़कर के कोई कर्तव्य कर्म मुझे तो समझ में नहीं आता। जब भगवान ने अर्जुन जी से कहा मामुन स्मरण युद्धच मेरा स्मरण करते हुए युद्ध करो तो हमें लगता है कि हर कार्य भगवान का भजन करते हुए हो सकता है।
तो जब हम एकाग्र होकर अपना कार्य कर रहे हो, भगवान को भूल गए हो, तो वह कर्म भगवान को समर्पित कर दें और शेष समय बार-बार आप ऐसा प्रयास करें कि राधा राधा राम राम कृष्ण कृष्ण हरि हरि शिव शिव जिसको जो प्रिय लगे वो नाम बराबर जपने का प्रयास करें। ऑफिस जा रहे हैं। नाम जप कर रहे हैं। बैठ गए नाम जप कर रहे हैं। लैपटॉप में काम कर रहे हैं। एक घंटा काम किया। कृष्णपणमस्तु। एक घंटे को कृष्ण अर्पणमस्त कर दिया। फिर नाम जप कर रहे हैं। फिर समय को भगवान को अर्पित कर दिया।
ऐसे आठ घंटे या 12 घंटे जो हम ड्यूटी करते हैं, जो काम करते हैं वो सब भगवान को समर्पित कर दें और बीच-बीच में नाम जपने का प्रयास करें तो जरूर सफलता प्राप्त होगी। इसलिए सबसे प्रार्थना है आप प्रयास कीजिए। हारिएगा नहीं। उत्साह बढ़ाइए और हर कार्य के बीच में राधा राधा बोल लीजिए। फिर कार्य करते रहिए तो आपका परम मंगल हो जाएगा। सारे दुख नष्ट हो जाएंगे। भगवान के नाम में पाप नाशक शक्ति है। जब पाप नष्ट हो जाएंगे तो दुख ही नहीं रहेगा। इसलिए हमें लगता है खूब नाम जप करो।
मन के चक्कर में मत पड़ो। मन लगे ना लगे तुम खूब नाम जप करो। तुम्हारा मंगल
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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