धोखे से भी हो सकता है भला? पूरी कहानी
पूज्य महाराज जी के श्रीमुख से भक्त-चरित्र — पूरी कथा ऊपर वीडियो में सुनें।
पूरा प्रवचन
एक राजा का एक सरोवर था जिसमें मछलियां पाली गई थी और वो मछलियों की सेवा करने आता था और उसने मछलियों की रक्षा के लिए एक नियम लगा रखा था अगर कोई मछली को मारेगा तो उसे प्राणदंड दिया जाएगा। राज आज्ञा एक दिन एक गरीब मछुआरे ने देखा कि बहुत सी मछलियां है पर उसने सुन रखा था प्राणदंड मिलेगा। दो मिनट में सैकड़ों मछली मान लेते हैं कौन देखता है और वो तालाब में जाल फेंक करके मछलियों को समेट ही रहा था कि घोड़ों की टाप की आवाज सुनाई दी। धूल देखी तो लगा कि राजा की सवारी आई।
उसने कहा अब तो पक्का मारे गए। तो जाल को मिट्टी में दबा दिया। कपड़े उतार दिए और मिट्टी से ऐसे संत वेश बना लिया। संत वेश बनाकर आंख मूंद कर बैठ गया। उसने सोचा प्राण बचाने का एक उपाय यही है। राजा वहां से निकले देखा कि सरोवर के किनारे कोई संत और बहुत बड़ा संत शरीर में कोई कपड़ा ले। अशर्फियां ली। चुपचाप चरणों में जाकर चढ़ाई। साष्टांग दंडवत हुए और धीरे से चले गए कि महाराज के ध्यान में विघ्न ना पड़े। जब वो चले गए उसने आंख खोला देखा अशरफिया जहां मुझे प्राणदंड देना चाहिए वहां मुझे नमस्कार करके चला गया।
जब मैंने नकली वेश धारण किया तो एक राजा प्रणाम करके चला गया। यदि मैं असली में भगवान का बन जाऊं तो क्या होगा? आज से मैं सब कुछ छोड़ता हूं और भगवान का भजन करता हूं।
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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