जब फाँसी की सज़ा रोकने स्वयं भगवान आ गए
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
श्री राम नाम के एक भक्त थे। वो बड़े करुणाशील थे। भक्त में करुणा होती, दया होती तो वो बादशाह के खजानची थे। जैसे कोई गया महाराज मैं गरीब आदमी हूं। बेटी का ब्याह है तो खजाने से वो दे देते। यद्यप चाहिए कि राज आज्ञा लेकर खजाने से दें। राज आज्ञा क्योंकि वो इतना दयावान करुणावान तो था नहीं कि सब गरीबों के लिए वो आज्ञा कर दे। इसलिए वो कर देते थे। धीरे से काजी को पता चला। जांच हुई तो बात पक्की मिली। और उन्होंने स्वीकार किया कि हम बिना राज आज्ञा के खजाने से हम दे देते हैं कोई अपराध बनाना उनको राजा ने बादशाह ने फांसी की सजा सुनाई हमें फांसी दे दे वो बड़े भक्त भगवान का भजन करने वाले बड़े करुणा में जब वो राज आज्ञा में रहते थे लेकिन वो संत थे उनका चरित्र आया श्री राम जी का चरित्र है वो मुस्कुरा दिए जब फांसी की आज्ञा हुई तो मुस्कुरा दिए उनके आराध्य देव थे महाराष्ट्र में जो विराजमान विट्ठल भगवान है विट्ठल भगवान आराध्य देव थे तो कहा जैसी विट्ठल की कृपा कहा तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है?
उन्होंने कहा एक बार विट्ठल भगवान के सामने से मुझे निकलवा दो। मतलब एक बार आंख मिलवा दो। उनको बंधन में डाल कर के और विट्ठल भगवान के सामने गए और कहा आप राजी हो? तो चल दिए। आप राजी हो कि मुझे फांसी हो तो हम राजी हैं। जोई जोई प्यारो करे जोई भाई यदि प्यारे तुम्हें ऐसा लगता है कि अब मेरा शरीर अंत हो फांसी के द्वारा कोई बात नहीं। इधर भगवान पहुंचे बादशाह के पास 15 16 वर्ष की अवस्था भगवान तो कितना भी आग को कितना भी छुपा छुपते थोड़ी कमल नयन मुस्कुरा करके सलाम किया वो पहली बार तो रुपए देख करके उसका होश उड़ गया उन्होंने कहा सुनो हमारे मालिक को तुमने फांसी की सजा सुनाई खजाने के कारण और ऐसे पीतांबर से छोड़े वो हीरे बोले हीरे रत्न ऐसे हैं तेरा खजाना कुछ नहीं है और देखा कि वो बड़े कीमती ये ले और तुरंत मेरे आदेश कर मेरे मालिक को छोड़ा जाए बोले मालिक बोले श्री राम मेरा मालिक है।
मैं उनका नौकर हूं भगवान। तो बोले श्री राम ने तो कभी बताया नहीं। बोले इतने गुप्त है कि पूछो मत। हमने मना किया कि तुम्हारी नौकरी ना करें। हमारे पास ऐसे खजाने में है ही नहीं रत्न और हीरे जैसे हमारे मालिक के पास है। अब वो तुरंत आदेश करने में लगा। जाओ तुरंत उनको रोको। वो वध स्थान की तरफ ले गए। कहीं उनको फांसी ना दे दी जाए। घुड़सवार दौड़े उनको रोको। इतने में भगवान अंतर्धन हुआ। अब वो पागल बादशाह कहां गया वो? कहां गया? बादशाह हाथ जोड़कर बोले एक बार अपने नौकर के दर्शन करा दो, दीदार करा दो।
बोले हमारे कौन नौकर? हम तो आपका नौकर हैं। बोले नहीं उसका नाम बिट्ठू था। बिट्ठू बोला था और वो इतनी अवस्था का लगभग था और ये हीरे देकर उनके आंखों में आंसू आ गए। अरे बोले यह नौकर नहीं अखिल ब्रह्मांडों के मालिक भगवान विट्ठल हैं जो हमारी रक्षा के लिए आपके सामने ऐसे आए
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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