लोग ‘पतली’ कहकर मेरा मज़ाक उड़ाते हैं, तो मन टूट जाता है।
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
महाराज जी मतलब लोग बहुत टिप्पणियां करते हैं कि मैं पतली हूं और यह है और उससे फिर मेरा मन टूट जाता है। तो महाराज जी ऐसे ही बहुत सारे ऐसे प्रश्न आते हैं कि मैं मोटा हूं। हमें लोग क्या कहेंगे ये हमें छोड़ना पड़ेगा। किसी का शरीर कर्मु गोरा है। किसी की एक आंख है। किसी की दोनों आंख नहीं है। कोई काला है, कोई पतला जैसा हमारा कर्मु शरीर हो। हमको इस पर किसी की टीका टिप्पणी पर ध्यान नहीं देना चाहिए। भगवान की आराधना करनी चाहिए और पर्याप्त प्रसन्न रहना चाहिए।
हमें भगवान ने जितना दिया, जो रूप दिया, जो शरीर दिया वो मैं नहीं हूं। भगवान ने दिया है। वैसे ही हमारे कर्म के अनुसार हमें प्रसन्न रहना चाहिए। कुछ लोग हैं जो अपने शरीर को लेकर परेशान रहते हैं। जैसे आप परेशान हो। अरे क्या लोग हैं? क्या कहे? लोग कुछ भी कहे। हमको अपनी मस्ती में मस्त रहना है। शरीर का मोटा होना, पतला होना, सुंदर होना, काला होना ये कोई खास बात नहीं। दिल का अच्छा होना खास बात है। आप दिल की अच्छी बनो। भगवान नाम जप करो। भगवान की भक्ति पतला शरीर तो अच्छा होता है।
अभी मोटे दुखी हो जाएंगे। मर्जी आपने अच्छा हम ये हम ये कह रहे हैं कि चाहे पतले हो चाहे मोटे सबका शरीर दुखदाई है। आप अच्छा बनो। आप अपने को अच्छा मानो दुखी मत मानो। हम आपकी बड़ा ही करते हैं। तुम नाम जप करो। भगवान को भजन करो। लेकिन मरोगे ये भी बात जानते। चाहे मोटे शरीर वाले हो चाहे पतले शरीर वाले हो भरोगे। इसका नाम मृत्यु लोक है। क्या शरीर पर प्रेम करना? क्या शरीर पर अपमान करना? नाम जप करो जैसा शरीर भगवान ने दिया।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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