क्या ग्रहों की दशा हमारा बुरा कर सकती है?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
महाराज जी जब किसी व्यक्ति के साथ कुछ अनिष्ट हो जाता है तो लोग ग्रहों को दोष देते हैं। क्या ग्रहों की दशा कर्मों के फल को प्रभावित करती है या हमारे कर्म ग्रहों की दशा से बचा सकते हैं? जैसे अब हमको बुरा समय व्यतीत करना है। बड़ा कष्ट भोगना है तो नक्षत्र बुरी दशा में बैठ जाएंगे जाकर क्योंकि कर्म के अनुसार भोग भोगना है। अगर हमारा सही समय आ गया है तो नक्षत्र जो है अच्छी दशा में बैठ जाएंगे और एक दशा हम तुम्हें बताए देते हैं। भगवान की यदि शरण में हो तो ये बुरी से बुरी दशा में बैठ जाए।
कुछ नहीं बिगाड़ सकते। एक आदमी हित धाम में मिला वो कई लोहे के छल्ले पहने थे। हमने कहा ये क्या है? बोले घोड़े की नाल के हैं। तो हमने कहा इनसे क्या होता है? बोले शनिचर का प्रभाव नहीं चढ़ेगा हमारे ऊपर। अरे वो घोड़ा तो बच नहीं पा रहा। कुंतलो मनो लद करके रोड में दौड़ रहा है और उसकी नाल तुम पहन लोगे वो नाल तुम्हें बचा लेगी कर्म बंधन से। अरे राधा राधा रटो राधा राधा रटो इधर उधर के चक्कर में मत पड़ो। जहां राधा वहां कोई बाधा नहीं। जिसको साढ़े साती चढ़ा हो राधा राधा रटना।
अगर कुछ बिगड़ जाए तो हमें बता देना। और ऐसे चाहे कुंतलो तेल चढ़ा दो। शनि भगवान प्रसन्न होने वाले नहीं। भगवत विमुख होकर मनमानी आचरण करने वाले के ऊपर ये देवता है। ये सब नक्षत्र देवता है और ये सब भगवान के पार्षद है। जब आप भगवान के सम्मुख हो जाओगे तो ये कृपा करने लगेंगे। ये आपका विरोध छोड़ देंगे। जब आप भगवान से विमुख आचरण करोगे तो यही आपका विरोध करने लगेंगे। अशांति पैदा कर देंगे। विघ्न पैदा कर देंगे। में विपत्ति पैदा कर देंगे।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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