नौकरी चली जाए तो क्या किसी के आगे हाथ फैलाना सही है?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
यदि आपके किसी गृहस्थ साधक के जीवन में कोई समस्या आ जाए जैसे कि नौकरी चली गई या कोई अन्य समस्या आई तो क्या वो किसी सांसारिक व्यक्ति से सहायता मांग सकता है या इसमें क्या भाव रखे अगर पक्की निष्ठा है तो मंगो भो न बाप सो जो प्रभु राखे टेक अगर भगवान से टेक है तो मेरी नौकरी छुड़वा दी मैं भूखा रह के तुलसी दल और चरणामृत से काटूंगा लेकिन किसी से मांगूंगा नहीं तुम्हारी गरज हो तो हमें जिलाना हमारे परिवार को जिलाना निष्ठा इसे कहते अब इतनी निष्ठा ना हो तो मांग लो।
इतनी निष्ठा ना हो तो मांग लो। और अगर निष्ठा है तो आप देख लेना सब ठीक हो जाएगा। उसको देर नहीं लगती। वो एक एक सेकंड आपकी चित्तवृत्ति को देख रहा है। जिस समय आप भगवत भरोसे हो जाएंगे सब ठीक हो जाएगा। सब चलने लगेगा। वो कैसे चलाता है वो वाणी का विषय। हम बार-बार अपने सत्संग में कहते हैं कि गले तक तलवार आएगी बट आके हार बन जाएगी। हां मांगना तो भगवत चरणारविंद की आसक्ति वाले पुरुष को तो उचित नहीं है। अगर मांगना ही है तो फिर प्रभु से मांगो ना कि नौकरी छूट गई व्यवस्था करो।
लेकिन आप नहीं करोगे तो हम दूसरे की तरफ देखेंगे नहीं मर जाए चाहे तो शरीर जाए भूखो मर जाए पर हम किसी से मांगेंगे नहीं ठाकुर जी आप देख लो तो दो चार दिन देखेंगे भूखे रख के और जब देखेंगे कि लेर पक्का है तो व्यवस्था कर देंगे है।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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