एक पग धरती पर, एक पग स्वर्ग में..बताओ, तीसरा पग कहाँ रखूँ | Shri Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
बलि जी ने नहीं माने। गुरुदेव ने कहा कि तुम जानते नहीं हो ये तीन पग पृथ्वी मांगने वाले कौन है? मैं इनको जानता हूं। ये सर्वलोक महेश्वर भगवान श्री हरि वामन रूप में तुम्हारे सामने भिक्षुक रूप में खड़े मत देना नहीं तुम्हारी सामर्थ्य नहीं कि तुम तीन पग दे सको। ये सर्वस्व छीन लेंगे। तब उन्होंने कहा गुरुदेव यदि ये भगवान भिक्षुक बन करके आए हैं तब तो जरूर देंगे हम। क्योंकि इन्हीं के लिए तो आप हैं। इन्हीं के लिए यज्ञ है। इन्हीं के लिए मेरा जीवन है। प्रह्लाद जी के ये पौत्र कैसे धोखा खा सकते हैं।
इतने बड़े महा भागवत के बेटे के बेटे हैं। ये धोखा नहीं खा सकते। गुरुदेव ने कहा मैं श्राप देता हूं। यदि मेरी आज्ञा का पालन नहीं करोगे। अवश्य दे दीजिए। मैं शिरोधार्य करता हूं। जा स्त्री भ्रष्ट हो जा। स्वीकार कर लिया लेकिन गुरु की आज्ञा का पालन नहीं किया। भगवान को दान नहीं देना। तीन पग पृथ्वी का संकल्प किया। गुरुदेव सर्वज्ञ थे। जानते थे भगवान शुक्राचार्य जी ये कौन है वैसा ही हुआ आखिर में बलि को बांध दिया भगवान ने और कहा बड़ा दानी बनता था गुरु के भी वचन नहीं माने अब बोल तीसरा पग कहां रखूं क्योंकि दो में ही समस्त ब्रह्मांडों को नाप लिया बलि जी ने हाथ जोड़कर कहा प्रभु अभी तो हमने प्रणाम भी नहीं किया आपको हाथ बंधे हुए हैं नहीं तो हाथ जोड़कर पहले आपके चरणों में माथा रखा आपने दो पग में हमारी संपत्ति नापी तीसरा पग हमारे ऊपर रखिए माथे पर क्योंकि अभी संपत्तिवान बकाया तनिक भी रोष नहीं भगवान बिक गए आज भी रसातल में सुतल लोक में बलि के दरवाजे पर खड़े हुए बामन रूप से हैं स्वयं सुरक्षा कर रहे
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मूल वीडियो: Shri Hit Radha Kripa (YouTube)
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