भगवान पास थे, पर भक्त के पास समय नहीं था | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
विदेह नगर के राजा बहुलाश जी प्रातः कालीन वेला से ठाकुर सेवा में लग जाते और 2:00 बजे तक दोपहर की सेवा करते। एक दिन देवर्षि नारद जी आए और कहा आप जिनके श्री विग्रह की सेवा करते हैं द्वारिका में साक्षात विराजमान है दर्शन किए और उन्होंने कहा हमारे पास समय नहीं इसके बाद हमें राज सेवा करनी होती है पर प्रातः से 2:00 बजे तक दिन तक केवल हमारी ठाकुर सेवा होती है तो उन्होंने कहा जिनकी सेवा कर एक बार तो आप द्वारिकापुरी जाओ और दर्शन करो कहा जैसी आपकी आज्ञा प्रातः काल हुआ सारथी से कहा रथ सजाकर तैयार करो हम पूजा करके फिर चले चलेंगे भगवान के दर्शन करने द्वारिकापुरी ऐसा ही हुआ रथ सजा दिया अब जब पूजा में लगे तो अनुराग पूर्वक पूजा करते हुए ठीक 2:00 बजे कहा आज तो अब समय नहीं है दूसरे दिन फिर ऐसे रोज रथ तैयार होता लेकिन पूजा अनुराग में इतने मगन हो जाते कि उससे छोटी कर ही नहीं पाए ठीक दो बजे संपन्न होती फिर राज काज जानते हो क्या हुआ इस पूजा का परिणाम स्वयं द्वारिकाधीश श्री सुखदेव आदि बड़े-बड़े परमहंसों को साथ लेकर जनकपुरी आए और महाराज बहुलाश्र को दर्शन दिए।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Shri Hit Radha Kripa (YouTube)
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