भगवान ने एक साल तक ब्रज रज क्यों खाई? जानिए रहस्य | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
दाऊ दादा ने आकर कहा मैया लाला ने ब्रह्मांड घाट की रज पाई है। मैया ने कहा ऐसे रज पाएगा तो तू बीमार हो जाएगा। वात्सल्यने रज पाई। लाल जी ने कहा नहीं दाऊ दादा कभी झूठ नहीं बोलते। दाऊ सदैव सत्य बोलते हैं। तुम जरूर झूठा बोल रहे होंगे। अब मैया मैं क्यों झूठा बोलूंगा? नहीं नहीं तो तू डर के झूठा बोल रहा है। मैया सही तो मैं ही बोलता हूं। क्यों? क्योंकि अनंत ब्रह्मांड मेरे में विराजमान है तो रज की क्या बात? देख आंत ब्रह्मांडों को दाऊ दादा साथ रहते थे इसलिए कहा रहो साथ अब मैं ऐसी लीला करूंगा कि पूरे ब्रज 84 कोस की रज को पाऊंगा तुम नहीं रोक पाओगे क्या लीला की अपने बेटा ब्रह्मा की बुद्धि घुमा दी इनकी नाभि कमल से प्रकट हुए ब्रह्मा जी तो बेटे ही हुए ना सबके पिता पितामह ब्रह्मा जी और ब्रह्मा जी के भी बाप आप है जरा सी बुद्धि घुमा दी उन्होंने बछड़ों को सखाओं को स्वयं लाखों की संख्या बछड़ों की थी जब 9 लाख यहां बाबा के यहां आई थी तो और नंद उपनंद के थी और पूरे ब्रजवासियों की थी।
लाखों की संख्या में जो बछड़े थे वो स्वयं लाल जी बने और एक वर्ष तक घास चरने के बहाने संपूर्ण ब्रज मंडल की रज को चखा। यह ब्रज रज है। एक दिन दाऊ दादा ने देखा कि जितना प्रेम श्री कृष्ण के प्रति मेरे हृदय में उतना ही प्रेम बछड़ों को देख के होता है। सखाओं को देख के होता है। उतना ही प्रेम ये ब्रजवासी जन अपने बच्चों से करते हैं। बछड़ों से करते हैं। ऐसा तो नहीं हो सकता। किसी की माया मुझे मोहित नहीं कर सकती। क्या है? ये आकर्षण क्या है? जो अपने स्वरूप में आकर देखा तो सब श्री कृष्ण बछड़े श्री कृष्ण सखा श्री कृष्ण छड़ी श्री कृष्ण।
तो हो ये तो मेरे प्रभु साक्षात बने हुए तब देखा कि ब्रह्मा जी के द्वारा ये लीला रज चखने के लिए ठाकुर जी ने ब्रह्मा जी की बुद्धि फेर दी एक वर्ष तक लाखों बछड़ों का रूप धारण करके संपूर्ण ब्रज मंडल की रज चा ये वृंदावन की रज है।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Shri Hit Radha Kripa (YouTube)
संबंधित
- जिससे प्रेम होता है, उसकी हर चीज़ प्यारी लगती है — जब हम किसी को अपना मानते हैं तो बार-बार उसकी चर्चा करने में, बार-बार उसकी चर्चा सुनने में और वह गली भी प्यारी लगती है जिसमें अपना प्यारा रहता है और उसके पड़ोसी भी प्यारे लगते…
- भगवान कब मिलते हैं? हर साधक को जानना चाहिए | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj — एक बार नारद जी महाराज भ्रमण करते हुए जा रहे थे तो कुछ समीप पे एक बट वृक्ष के नीचे महात्मा भजन कर रहे थे एक पीपल के नीचे भजन कर रहे थे तो नारद जी को प्रणाम करके बट वृक्ष वाले…
- मौका बार-बार नहीं मिलता.. कहीं देर न हो जाए! — यह जितनी भी गंदी बातें हैं मदिरापान करना, मांस खाना, जुआ खेलना, व्यभचार करना यह सब महापाप है। बुद्धि को भ्रष्ट कराकर ऐसे जीव को नष्ट हो जाता। यह समझ में नहीं आता। मनुष्य शरीर…
- माँगी हुई हर चीज़ क्यों नहीं मिलती, क्या वजह है? — मां के पास गए हमें इतने रुपए दीजिए नहीं हमें चाहिए इतने नहीं देंगे नहीं देंगे नहीं देंगे तो बदमाश बर्बाद करेगा तो यह बात मां से ही हो सकती है दूसरे से नहीं हो सकती आप दूसरे से…
- 🤍🤍राधापिय जू के फूल बंगला में दर्शन 🤍🤍 — राधा राधा श्री राधा राधा राधा राधा श्री राधा राधा श्री राधा राधा राधा राधा श्री राधा [घंटा] राधा श्री राधा राधा राधा राधा श्री राधा राधा श्री राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा…
- कलियुग में ऐसा क्या खास है जो सतयुग में भी नहीं? — कलयुग पापों का विस्तार करेगा तो मुनियों ने विचार किया कि पापों से कैसे बचा जाए तो भगवान व्यास देव जी उस समय गंगा जी में स्नान कर रहे थे तो सबने सोचा चलो व्यास जी से चलकर के…