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चंदन की तरह बनो, कुसंग का विष मत अपनाओ!

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

अगर तुम्हें सत्संग मिलता है तो कुसंग भी अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश करेगा। आपकी निष्ठा, आपकी भावना इतनी सुरक्षित होनी चाहिए कि किसी का भी कुसंग का प्रभाव हमारे मन पर ना पड़े। जो रहीम उत्तम प्रकति का कर सकत कुसंग चंदन विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग। चंदन में बड़े-बड़े फणधारी सांप लिपटे रहते हैं शीतलता प्राप्त करने के लिए। लेकिन चंदन अपना शीतलता देता है। उसका दोष विष नहीं ग्रहण करता। ऐसे ही कुसंगी पुरुष अगर कभी हमारे पास बैठे उसका मंगल हो। हम उसकी अमंगल भाषा नास्तिक भाषा अपने मन में अपने श्रवण इंद्र में कभी ना बैठा ले तो फिर गुरु आज्ञा का पालन करने में हमारा मन उत्साहित होकर चल पड़ेगा।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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