॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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Shri Hit Chaurasi Ji — pad 39

khelyau lal chahat ravan |
rachi-rachi apne hath sanvaryau, nikunj bhavan ||
rajni shrad mand sourabh sao, shital pawan |
to binu kuwari kam ki vedan, metav kavan ||
chalhi na chapal bal-mrignainni, tajiv mavan |
(jai shri) hit Harivansh milav pyare ki, arti-davan || 39 ||
खेल्यौ लाल चाहत रवन ।
रचि-रचि अपने हाथ सँवारयौ, निकुंज भवन ॥
रजनी शरद मंद सौरभ सौं, शीतल पवन ।
तो बिनु कुँवरि काम की वेदन, मेटव कवन ॥
चलहि न चपल बाल-मृगनैंनी, तजिव मवन ।
(जै श्री) हित हरिवंश मिलव प्यारे की, आरति-दवन ॥39॥