श्री हित चौरासी जी — पद 5
आजु प्रभात लता-मंदिर में,
सुख बरसत अति हरषि युगल वर ।
गौर श्याम अभिराम रंगभरे,
लटकि-लटकि पग धरत अवनि पर ॥
कुच-कुमकुम रंजित मालावलि,
सुरत नाथ श्रीश्याम धाम धर ।
प्रिया प्रेम के अंक अलंकृत,
चित्रित चतुर-शिरोमणि निजकर ॥
दम्पति अति अनुराग मुदित कल,
गान करत मन हरत परस्पर ।
(जैश्री) हित हरिवंश प्रशंस-परायण,
गायन अलि सुर देत मधुर तर ॥5॥