ऐसी स्वप्न मोहि अति भावे।
न समीप मोहिनी मूरत, मंद - मंद मुसिकावै॥
कोटि चन्द छवि सुन्दर आनन, रूप सुधा बरसावै।
भोरी रंग भरी अलबेली, हिय में आइ समावै॥
ऐसी स्वप्न मोहि अति भावे।
न समीप मोहिनी मूरत, मंद - मंद मुसिकावै॥
कोटि चन्द छवि सुन्दर आनन, रूप सुधा बरसावै।
भोरी रंग भरी अलबेली, हिय में आइ समावै॥