॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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Prem Ki Peer — pad 198

atma-nivedan

tum to dou rahat ras chhake |
nit nav has vilas raas ras, magan sada sukh taake ||
bhori arat terat dwrae, bachan sune ko taake |
pran ki laj kripalu sundari, harau ashubh - shubh vake ||
तुम तो दोऊ रहत रस छाके।
नित नव हास विलास रास रस, मगन सदा सुख ताके॥
भोरी आरत टेरत द्वारे, बचन सुने को ताके।
प्रण की लाज कृपालु सुन्दरी, हरौ अशुभ - शुभ वाके॥