तुम तो दोऊ रहत रस छाके।
नित नव हास विलास रास रस, मगन सदा सुख ताके॥
भोरी आरत टेरत द्वारे, बचन सुने को ताके।
प्रण की लाज कृपालु सुन्दरी, हरौ अशुभ - शुभ वाके॥
तुम तो दोऊ रहत रस छाके।
नित नव हास विलास रास रस, मगन सदा सुख ताके॥
भोरी आरत टेरत द्वारे, बचन सुने को ताके।
प्रण की लाज कृपालु सुन्दरी, हरौ अशुभ - शुभ वाके॥