बीत गये दिन सोच न अबहूँ॥
ध्यान कियौ छिन नाम लियौना, हृदय न भाव भयौ कबहूँ।
सन्त मार्ग तजि छाँड़े कुल ब्रत, और कुकर्म किये सबहूँ॥
ठाँव न कोटि नरक में दीसत, नहिं पछितात बेठिक लबहू।
भोरी की स्वामिनि अलबेली, चरण कञ्ज की आसा तबहूँ॥
बीत गये दिन सोच न अबहूँ॥
ध्यान कियौ छिन नाम लियौना, हृदय न भाव भयौ कबहूँ।
सन्त मार्ग तजि छाँड़े कुल ब्रत, और कुकर्म किये सबहूँ॥
ठाँव न कोटि नरक में दीसत, नहिं पछितात बेठिक लबहू।
भोरी की स्वामिनि अलबेली, चरण कञ्ज की आसा तबहूँ॥