॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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प्रेम की पीर — पद 203

आत्म-निवेदन

बीत गये दिन सोच न अबहूँ॥
ध्यान कियौ छिन नाम लियौना, हृदय न भाव भयौ कबहूँ।
सन्त मार्ग तजि छाँड़े कुल ब्रत, और कुकर्म किये सबहूँ॥
ठाँव न कोटि नरक में दीसत, नहिं पछितात बेठिक लबहू।
भोरी की स्वामिनि अलबेली, चरण कञ्ज की आसा तबहूँ॥