॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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प्रेम की पीर — पद 20

श्री राधावल्लभ लाल

श्री राधावल्लभ रंग भरे लाल।
कबहूँ मोहि कृपा करि हेरौ, चरण शरण प्रतिपाल॥
कबहें हरो हृदय कठिनाई, कोमल चित्त कृपाल।
ऐसी प्रीति हिये में दीजै, जरहुँ विरह की ज्वाल॥
त्रिभुवन विदित किशोर-किशोरी, परम उदार दयाल।
भोरी हृदय प्रीति हँसि दीजै, विलपत द्वार विहाल॥