देखन दै नैक छटा नीकी।
चहुँ दिशि ललित भूमि हरियाली, ऊपर झुकी घटा नीकी॥
चपला कोटि दिव्य द्युति मूरति, ठाड़ी मंजु अटा नीकी।
पल में हठ अपनाइय भोरी, निगम की रीति हटा नीकी॥
देखन दै नैक छटा नीकी।
चहुँ दिशि ललित भूमि हरियाली, ऊपर झुकी घटा नीकी॥
चपला कोटि दिव्य द्युति मूरति, ठाड़ी मंजु अटा नीकी।
पल में हठ अपनाइय भोरी, निगम की रीति हटा नीकी॥