कोमल चित मन मोहन, कबहू मेरी सुरति करैहौ।
सहज कृपाल दयानिधि प्यारे, जब-तब अवसर पैहौ।
सहज द्रवन की बान सदा हौ, दिल दरदीले कहैहौ॥
आरत हरण दीन दुखिया की, बिनय सुनत चित लैहौ।
भोरी बलि-बलि जाइ चरण पै, सोयो भाग जगैहौ॥
कोमल चित मन मोहन, कबहू मेरी सुरति करैहौ।
सहज कृपाल दयानिधि प्यारे, जब-तब अवसर पैहौ।
सहज द्रवन की बान सदा हौ, दिल दरदीले कहैहौ॥
आरत हरण दीन दुखिया की, बिनय सुनत चित लैहौ।
भोरी बलि-बलि जाइ चरण पै, सोयो भाग जगैहौ॥