या जीवन की चरचा न चलये।
प्राणनाथ सौं पोच प्राण की, बात कौन विधि कहिये
असन-बसन-तन सोचि पोच सब, पानी माहि बहैये।
मिलन आस पर तन मन वारिय, बड़े भाग्य जो पैये॥
नातर बैठि-बैठि भरि साँसें, सोचत द्यौस बितैये।
सजल नयन तनु पुलक मग्न मन, नाम टेर रट लैये॥
गाढी पीर बढै उर अन्तर, मुख सौं कछू न कहिये।
टूक-टूक हिय कीजिय भोरी, औषध वैद्य न चहिये॥