कहौं जो मुख कहि आवत बात।
ऐसी और न बान काहु की, सत्य कहौं सौं खात॥
सकल लोक चूड़ामणि प्यारौ, चरणन सीस नवात।
सो चमार कै हेत लिये जल, धावत आधी रात॥
जाकौ नाम सुनत मन मोहन, नयनन नीर बहात।
सोई अली किशोरी प्यारी, टेर सुनत अकुलात
सोतौ नारि विरह सौं व्याकुल, छिन-छिन टेर सुनात।
कारण रहित कृपालु महल में, सुनि-सुनि कै सकुचात॥
भोरी पामर नीच अधम अति, सब जग नाम धरात।
तौहू तुम्हें सुरत हिय ताकी, अस जिय जानी जात॥