श्री राधे तोहि कैसे कै जानौं।
कैसौ रूप कहा छबि सोभा, बैठ-बैठ अनुमानौं॥
कहा सुभाव माधुरी लीला, कोटि कलपना ठानौं।
ऐसौ भाग्य जागि है कबहूँ, देखि-देखि हिय आनौं
एहो करुणा धाम किशोरी, जो हिय की पहिचानौ।
तौ किन भोरी प्रगट करत अब, सहज कृपा कौ बानौ॥
श्री राधे तोहि कैसे कै जानौं।
कैसौ रूप कहा छबि सोभा, बैठ-बैठ अनुमानौं॥
कहा सुभाव माधुरी लीला, कोटि कलपना ठानौं।
ऐसौ भाग्य जागि है कबहूँ, देखि-देखि हिय आनौं
एहो करुणा धाम किशोरी, जो हिय की पहिचानौ।
तौ किन भोरी प्रगट करत अब, सहज कृपा कौ बानौ॥