हौं प्यारी तोहि मन की बात सुनावौं।
कारण रहित कृपालु किशोरी, कौन भाँति तोहि पावौं॥
जो मन बस में होत कृपानिधि, चरणन ध्यान लगावौं।
जो तन सौं सहि जात लाड़िली, तौ तप योग करावौं॥
जो उर प्रीति होत करुणामय, तौ छाती दरकावौं।
हियरा टूक-टूक करि छिन में, सकल अभाग्य मिटावौं॥
सो तौ ऐक बनत न दयानिधि, कहा करौं कित जावौं।
भोरी ललकि-ललकि दरसन कों, रोह-रोइ रहि जावों॥