कोटि कुलिस सौ कठिन हियौरी।
अजहूँ दरकत नहीं दयानिधि, करुणाधाम किशोरी।
किस विधि प्रीति रीति उर ऐहै, सोचे यत्न करोरी॥
तौहू सुनहु कृपालु सुन्दरी, कछु नहिं ठीक परचौरी।
भोरी कहा कहै अलबेली, तुम हो बिहेंसि कहौरी॥
कोटि कुलिस सौ कठिन हियौरी।
अजहूँ दरकत नहीं दयानिधि, करुणाधाम किशोरी।
किस विधि प्रीति रीति उर ऐहै, सोचे यत्न करोरी॥
तौहू सुनहु कृपालु सुन्दरी, कछु नहिं ठीक परचौरी।
भोरी कहा कहै अलबेली, तुम हो बिहेंसि कहौरी॥