॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

प्रेम की पीर — पद 314

आत्म-निवेदन

पोच प्राण की गिनती कीनी।
वा पद कंज छटा पर वारौं, त्रिभुवन शोभा जितनी॥
दृग भरि कबहुँ माधुरी प्यावौ, आस पुजावौ इतनी।
स्वर्ग-मुक्ति-संपति-सिधि भोरी, तृन सम गिनत न तितनी॥