॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
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Prem Ki Peer — pad 324

atma-nivedan

kripa sindhu umdaugi kbahu |
haun kab ki tohi terat arat, tain na sunat abhun ||
hon to hath bikani bhori, soch nahi labhun |
bit jai varu janm kishori, hath na tajon kbahu ||
कृपा सिंधु उमड़ौगी कबहूँ।
हौं कब की तोहि टेरत आरत, तैं न सुनत अबहूँ॥
हों तो हाथ बिकानी भोरी, सोच नहीं लबहूँ।
बीत जाइ वरु जन्म किशोरी, हठ न तजों कबहूँ॥