नवल वयस योवन मतवारी।
व्रज नव तरुणि कदंब नागरी, कृपा सिंधु सुकुमारी।
रूप रुचिर अङ्ग-अङ्ग माधुरी, कोक कलानिधि प्यारी॥
छिन-छिन कुशल सुधंग अङ्ग में, पोच पतित अधिकारी।
मत्त करिनि गति ढरत किशोरी, अङ्ग-अङ्ग छवि न्यारी॥
काहू भलै जानि नहिं पाई, श्री हित कृपा बिना री।
भोरी हित जन्मन की याचक, ललकत गोद पसारी॥