या द्वारे सौं नातौ हमारौ।
खोटे पतित निबाहन कारन, प्रगट रावरौ द्वारौ।
कितहू ठौर न ठीक दयानिधि, इक अवलम्ब तिहारौ॥
साधन और कछू नहिं सूझत, दृग लागत अँधियारौ।
भोरी की अलबेली स्वासिनि, चरण शरण प्रतिपारौ॥
या द्वारे सौं नातौ हमारौ।
खोटे पतित निबाहन कारन, प्रगट रावरौ द्वारौ।
कितहू ठौर न ठीक दयानिधि, इक अवलम्ब तिहारौ॥
साधन और कछू नहिं सूझत, दृग लागत अँधियारौ।
भोरी की अलबेली स्वासिनि, चरण शरण प्रतिपारौ॥