रैन अँधेरी मेह झर पवन चलत झकझोर।
नौका टूटी राखियौ हित हरिवंश किशोर॥
हित हरिवंश किशोर बोझ पापन कौ भारी।
भवनिधि ओर न छोर परी अब तौ मँझधारी॥
भवनिधि ओर न छोर शरण करुणानिधि तेरी।
भोरी हित तट दूर मेह अरु रैंन अँधेरी॥
रैन अँधेरी मेह झर पवन चलत झकझोर।
नौका टूटी राखियौ हित हरिवंश किशोर॥
हित हरिवंश किशोर बोझ पापन कौ भारी।
भवनिधि ओर न छोर परी अब तौ मँझधारी॥
भवनिधि ओर न छोर शरण करुणानिधि तेरी।
भोरी हित तट दूर मेह अरु रैंन अँधेरी॥