जे हित गिरा माधुरी छाके प्रेम सुधा मतवारे हैं।
जे हित कृपा कोर पै बारे तन मन जीवन हारे हैं॥
जे हित धर्म सुनावत समुझत उपदेशत ब्रत धारे हैं।
भोरी हित बलिहारी उनकी जे हित के हितवारे हैं॥
जे हित गिरा माधुरी छाके प्रेम सुधा मतवारे हैं।
जे हित कृपा कोर पै बारे तन मन जीवन हारे हैं॥
जे हित धर्म सुनावत समुझत उपदेशत ब्रत धारे हैं।
भोरी हित बलिहारी उनकी जे हित के हितवारे हैं॥