॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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प्रेम की पीर — पद 456

कुंडलियाँ

जे हित गिरा माधुरी छाके प्रेम सुधा मतवारे हैं।
जे हित कृपा कोर पै बारे तन मन जीवन हारे हैं॥
जे हित धर्म सुनावत समुझत उपदेशत ब्रत धारे हैं।
भोरी हित बलिहारी उनकी जे हित के हितवारे हैं॥