॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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प्रेम की पीर — पद 50

श्री प्रिया-चरण कमल

सजल जलज सुन्दर प्यारी पद नीके,
साधन और लगत अति फोके।
सीतल मकरंद भरे सुख रस भीने,
श्याम मधुप जिन रस बस कीन्हे।
सुन्दर श्याम प्यारौ दावानल पीकैं,
जियत आसरे मनु इनहीं के।
प्रेम विवस निसि दिन इनहि हिय लावैं,
नाग राज विष ताप मिटावैं।
चूमि - चूमि इनकौं इनके रस पाग्यौ,
तुरत पूतना विष सब भाग्यौ।
जब घुमड़ि मैन सैन बाँकी आवै,
तब मोहन शरण यहाँ पावै।
सुर तरु पतितन के अधमन उद्धारण,
मो अभाग्य मिटबे के कारण।
सरबस श्री हरि के दाता सब केरे,
आशा धन जीवन गति मेरे।
इतनौ नित टेर - टेर माँगै भोरी,
राखिये मोहि चरण रस बोरी।