प्यारी तेरो मुख चन्द नयौरी।
कैसौ सो शशि जाहि देखि कै, हरि दृग भये चकोरी॥
तीन लोक इक मदन किये बस, सहज चाप टंकोरी।
कोटि मदन दल दलन मनोहर, सो यह जीत लयौरी॥
ललकत दृग छिन दरसन आसा, करुणा धाम किशोरी।
एक झलक हँसि नैंक दिखावौ, बार-बार बलि भोरी॥
प्यारी तेरो मुख चन्द नयौरी।
कैसौ सो शशि जाहि देखि कै, हरि दृग भये चकोरी॥
तीन लोक इक मदन किये बस, सहज चाप टंकोरी।
कोटि मदन दल दलन मनोहर, सो यह जीत लयौरी॥
ललकत दृग छिन दरसन आसा, करुणा धाम किशोरी।
एक झलक हँसि नैंक दिखावौ, बार-बार बलि भोरी॥