हँसि-हँसि मोहि किन घायल कीजै।
जोपै इतनी कृपा कृपानिधि, तौ यह मांगे दीजै।
छिन इक भरि-भरि लोचन प्यारी रूप माधुरी पीजै॥
पुनि निशिवासर विरह तापसौं, यह तनु पल-पल छीजै।
भोरी सहज कृपाल किशोरी, अब बिलम्ब नहिं कीजै॥
हँसि-हँसि मोहि किन घायल कीजै।
जोपै इतनी कृपा कृपानिधि, तौ यह मांगे दीजै।
छिन इक भरि-भरि लोचन प्यारी रूप माधुरी पीजै॥
पुनि निशिवासर विरह तापसौं, यह तनु पल-पल छीजै।
भोरी सहज कृपाल किशोरी, अब बिलम्ब नहिं कीजै॥