कैसे रहस-दास्य हौं पावौं।
भोर उनींदी उठी किशोरी, देखत नैन सिरावौं।
निशि जागर आलस तनु छायौ, मज्जन बेगि करावौं॥
सजि तन नील बसन आभूषण, मधु मेवा लै आवौं।
किसलय शयन सँभारि किशोरी, हँसि-हँसि लै पौढावौं॥
भाग्य भरी हौ बैठि पाँयते, मृदु तरुवा सहरावौं।
भोरी सोवत नवल नागरी, देखि-देखि बलि जावौं॥